भारत प्राचीन काल से ऋषि एवं कृषि संस्कृति का संवाहक रहा है। जितना प्राचीन सृष्टि का उद्भव है, उतनी ही पुरानी कृषि परंपरा है। भारत एक कृषि प्रधान देश है। लगभग साठ प्रतिशत से अधिक लोग कृषि कार्य जुड़े हैं। सरकारों के तमाम प्रयासों के बावजूद आज भी भारत के किसान की स्थिति अच्छी नहीं है। कृषि एवं किसान भारतीय अर्थ व्यवस्था की रीढ़ है। जब तक भारत का किसान हर प्रकार से सशक्त एवं खुशहाल नहीं होगा, तब तक भारत विकसित राष्ट्र नहीं बन सकता है। आज आवश्यकता है कि जिस प्रकार से भारत सरकार स्मार्ट सिटी के लिए कार्य कर रही है, उसी प्रकार से भारत सरकार को स्मार्ट विलेज बनाने के लिए कार्य करना होगा। भारत के लगभग सभी महानगरों की अधिक जनसंख्या के कारण जल, वायु सहित तमाम प्रकार की व्यवस्थाएं असंतुलित हो रही हैं। गांव से शहर की ओर पलायन बहुत तीव्र गति से हो रहा है, जोकि देश के लिए चिंता जनक है।
आधुनिक तकनीक से भारत के किसान के फसल की पैदावार आसानी से बाजार तक पहुंचेगी और उसे उचित मूल्य प्राप्त होने में मद्दगार साबित होगा। आज विज्ञान का युग है और इस विज्ञान के युग में भारत में कृषि क्षेत्र में आपार संभावनाएं हैं। जरूरत है कि कृषि क्षेत्र में अधिक से अधिक निवेश हो और उनके अनुरूप रोजगार पैदा करने के लिए उद्योगों की स्थापना हो। जब तक कृषि में आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकी का अधिक से अधिक प्रयोग नहीं होगा, तब तक भारत के किसान को खेती में अधिक से अधिक उत्पादन प्राप्त नहीं होगा। भारत की युवा पीढ़ी को कृषि कार्य से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण पहल की आवश्यकता है। यह तभी संभव हो पाएगा, जब कृषि क्षेत्र में अधिक से अधिक रोजगार एवं सुरक्षा दिखाई देगी। दुनिया के बहुत सारे देश कृषि वैज्ञानिक तकनीकी के माध्यम से कम क्षेत्र में अधिक से अधिक उत्पादन कर रहे हैं और अधिक से अधिक अर्थाजन कर रहे हैं। भारत के किसान को कृषि तकनीकी से प्रशिक्षित करने की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। स्मार्ट विलेज बनने से गांव में रोजगार के अवसर पैदा होंगे और आने वाले समय में गांव से शहर का पलायन रूकेगा।